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गाय गोबर में लक्ष्मी जी का निवास

एक बार मनोहर रूपधारी लक्ष्मीजी ने गौओं के समूह में प्रवेश किया।उनके सौंदर्य को देख गौओं को बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने उनका परिचय पूछा। लक्ष्मी जी ने कहा – “गौओं तुम्हारा कल्याण हो ! इस जगत में सभी लोग मुझे लक्ष्मी कहते हैं। सारा संसार मुझे चाहता है। मैंने दैत्यों को छोड़ दिया, इसलिये वे नष्ट हो गये। इन्द्रादि देवताओं को आश्रय दिया तो वे सुख भोग रहें हैं। देवताओं और ऋषियों के शरीर में मेरे हीं आने से सिद्धि मिलती है।
जिसके शरीर में मैं नहीं प्रवेश करती उसका नाश हो जाता है। धर्म ,अर्थ और काम तो मेरे हीं सहयोग से सुख देनेवाले हो सकते हैं। मेरा ऐसा प्रभाव है। अब मैं तुम्हारे शरीर में सदा के लिये वास करना चाहती हूँ। इसके लिये स्वत: तुम्हारे पास आकर प्रार्थना करती हूँ, तुम लोग मेरा आश्रय ग्रहण करो और ' श्री ' सम्पन्न हो जाओ ” ।