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कामधेनु माता पौराणिक कथा- क्रमश:..

इधर जब सहस्त्रार्जुन के बचे हुए पुत्रों को जब पता चला कि परशुराम तीर्थ यात्रा पर गये हैं तो वे सब बदला लेने के लिये आश्रम पहुँचे। उस समय आश्रम में केवल माता रेणूका और महर्षि जमदग्नि थे। उन्होंने ध्यानमग्न महर्षि जमदग्नि का सिर काट दिया और माता रेणुका को मारने लगे। माता रेणुका ने अपने पुत्र परशुराम को पुकारा ।उस वक्त परशुराम तीर्थ में तपस्या में लीन थे । लेकिन माता की आवाज सुनकर वे तुरंत हीं अपने आश्रम को लौट आये। अपने पिता का शरीर भाईयों के पास छोड़कर, सहस्त्रार्जुन के महल मे गये। वहाँ. परशुराम ने सहस्त्रार्जुन के बचे हुये पुत्रों को मार डाला। अपाने आश्रम लौट कर वे पिता के शरीर को लेकर कुरुक्षेत्र गये। वहाँ पर और मंत्र की सहायता से अपने पिता के सिर को जोड़ दिया तथा उन्हें जीवित किया। अपने पिता को जीवित कर, सप्तऋषि मंडल में सातवें ऋषि के रूप में स्थापित कर दिया ।