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कामधेनु माता पौराणिक कथा-

पुराणों के अनुसार कामधेनु गाय समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी। पुराणों मे कामधेनु के कई नामों का उल्लेख है - नंद, सुनन्दा, सुरभि, सुशीला, सुमन इत्यादि। ऐसा माना जाता है कि मुनि कश्यप ने वरुण देव से कामधेनु मांगा था, लेकिन कार्य पुरा होने पर भी उन्होने कामधेनु को वरुण देव को वापस नहीं किया। इससे क्रोधित होकर वरुण देव ने कश्यप को श्राप दे दिया, और उनका जन्म, कृष्ण के काल में, ग्वाले के रूप में हुआ। कामधेनु माता की कथा, भगवान विष्णु के अवतार परशुराम से जुड़ी है। जमदग्नि ऋषि, परशुराम के पिता, को भगवान इंद्र ने कुछ समय के लिये कामधेनु गाय दी थी। एक बार सहस्त्रबाहु अर्जुन नाम के राजा उनके आश्रम मे पहुँचे। महर्षि ने उनका यथोचित स्वागत किया। राजा के मन में यह बात आई कि महर्षि ने उनका इतनी अच्छी तरह स्वागत कैसे किया। तभी उस राजा ने महर्षि के गौशाला में कामधेनु गाय को देखा। राजा समझ गया कि यह सब उस कामधेनु गाय का प्रभाव है।

The story of Kaamdhenu is related to God Vishnu’s avatar Parashuraam. Parashuraam is the youngest son of Maharshi Jamadagni and Renuka.God Indra had given kaamdhenu to maharshi Jamadagni to serve her for some period. At once, King Sahastrabaahu Arjun reached to his aashram. Maharshi welcomed the king in royalist style. King thought that how could it possible to welcomed with such a royalist way because maharshi had no wealth. Suddenly, King saw kaamdhenu cow at maharshi’s cowshed and he understand whole matter.