गौओं को घास खिलाने से श्राद्ध फल

विराट देश में एक बहुत ही निर्धन व्यक्ति रहता था। पिता की श्राद्ध तिथि के दिन उसके पास एक भी पैसा नहीं था जिससे वह अपने पिता के लिये श्राद्ध कर सके। यही सोच-सोचकर उसके आँखों से आँसुओं की अविरल धारा बहने लगी। वह एक महात्मा के पास गया और कहा- “हे महात्मन्! आज मेरे पिता की श्राद्ध तिथि है लेकिन मेरे पास एक भी पैसा नहीं है। अत: आप हीं बतायें मैं अपने पिता के हित की लिये क्या करूँ ?”
उस महात्मा जी ने कहा- “घबराओ नहीं, पितरों के उद्देश्यसे हरी-हरी घास काट कर लाओ और गौओं को खिला दो। इससे तुम्हें पिण्ड-दान से भी अधिक फल मिलेगा।”
यह सुनकर उस गरीब का मन प्रसन्न हो गया । वह अपने घर लौट आया । घास काट कर श्रद्धापूर्वक गौओं को चारा खिलाया। इस पुण्य के प्रभाव से उसके पिता तृप्त हुये और साथ-ही-साथ मरने के बाद उस व्यक्ति को भी देवलोक की प्राप्ति हुई।