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सर्वकामदुधे देवि सर्वतीर्थीभिषेचिनि ॥
पावने सुरभि श्रेष्ठे देवि तुभ्यं नमोस्तुते ॥

cow puja

पुजनीय गाय
हमारे देश में गाय को माता मान जाता है.यह प्रचलन पीढ़ीयों से चली आ रही है। पुराणों में भी गाय को माता के रूप में दर्शाया गया है । यह केवल एक पशु नहीं है। यह हम सबका अपने दूध रूपी अमृत से पालन करती है। इसलिये यह हमारी माँ के समान है। यहाँ गाय की पुजा की जाती है। पुराणों में एक ऐसी गाय का उल्लेख मिलता है, जिसे कामधेनु गाय कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि कामधेनु गाय में दैवीय शक्तियाँ होती थे, जिससे वह लोगों की मनोकामना को पूर्ण करती थी।

कामधेनु माता

cow puja

यह गाय हर तरह की मनोकामना को पूर्ण करती थी। इसके दर्शन कर लेने से हीं मनुष्य की सभी इच्छायें पूर्ण हो जाती थी। इसके दूध में अमृत के समान गुण पाये जाते थे यानी अमरत्व के गुण । इन्हीं कारणों से कामधेनु गाय को माता माना गया है। इनकी पूजा की जाती है। साथ हीं सभी गायों को माँ की उपाधी दी गयी है। कामधेनु गाय जिसके भी पास होती थी , उसकी सभी जरुरतें वे पूरा करती थी। एक माँ की तरह , यह अपने सभी भक्तों का पालन पोषण करती थी।

हमारे पुराणों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि कामधेनु माता के अंगों में हमारे सभी 33 करोड़ देवताओं सहित पूजनीय देवता तथा सभी 14 पौराणिक संसार मौजूद हैं।

cow puja

• गाय के दोनो सींगों में ब्रह्मा और विष्णु ।
• विश्व की सारी जलों के स्त्रोत का स्थान सींग के जुड़ाव पर स्थित है।
• सिर पर भोले शंकर का स्थान है।
• सिर के किनारे पर माता पार्वती जी है।
• नासिका पर कार्तिकेय, दोनों नासिकाओं के छिद्र पर कम्बाला और अश्वतारा हैं।
• दोनों कानों पर अश्विनी कुमार
• सूर्य और चंद्रमा का स्थान दोनों आँखों में है
• वायु देव का स्थान दाँतों की पंक्तियों में तथा और वरुण देव जीभ पर निवास करते हैं।
• गाय की आवाज में साक्षात् सरस्वती का वास है ।
• संध्या देवी होंठों पर और भगवान इंद्र गर्दन पर विराजमान हैं।
• रक्षा गणों का स्थान गर्दन के नीचे की पसलियों पर है।
• दिल में साध्य देवों का स्थान है।
• जांघ पर धर्म देव का ।
• गंधर्व खुर के बीच के स्थान में,पन्नगा खुर के कोने पर, अप्सराएं पक्षों पर
• ग्यारह रुद्र और यम पीठ पर, अष्टवसु पीठ की धारियों में
• पितृ देवता नाल के संयुक्त क्षेत्र में तथा 12 आदित्य पेट पर
• पूंछ पर सोमा देवी, बालों पर सूरज की किरणें, मूत्र में गंगा, गोबर में लक्ष्मी और यमुना, दूध में सरस्वती, दही में नर्मदा, और घी में अग्नि का वास है।
• गाय के बालों में 33 करोड़ देवताओं का निवास है।
• पेट में पृथ्वी, थन में सारे महासागरों
• तीनों गुण भौंह के जड़ों में, बाल के छिद्रों में ऋषियों का निवास, साँसों में सभी पवित्र झीलों का वास है।
• होठों पर चंडिका और प्रजापति ब्रह्मा त्वचा पर हैं।
• वेदों के छह भागों का स्थान मुखड़े पर, चारों पैरों में चार वेद हैं। कुबेर और गरुड़ दाहिने ओर,यक्ष बाईं ओर और गंधर्व अंदर की ओर स्थित हैं।
• पैर के सामने में खेचरास, आंतों में नारायण, हड्डियों में पर्वत, अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों पैरों में अवस्थित हैं।
• गाय के हूँकार में चारों वेदों कि ध्वनि है।